NSA AJIT DOVAL CHINA VISIT:भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल आज चीन दौरे पर हैं। सीमा पर चुनौतियों को लेकर कई अहम मसलों पर चीन से बातचीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डोभाल पर बड़ा भरोसा रहा है।
अजीत डोभाल का चीन दौरा
नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन दौरे पर बीजिंग के लिए रवाना हो रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे। दोनों तरफ के राजनयिक हफ्तों से इस पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। अजीत डोभाल के चीन भेजे जाने के पीछे डोकलाम डॉक्ट्रिन, अरुणाचल सीमा और चिकननेक का भूगोल और इतिहास भी है। डोभाल का यह दौरा इसलिए भी बहुत अहम है क्योंकि यह अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना से ठीक पहले हो रहा है।
चीन से सीमा विवाद के मुद्दे पर डोभाल ही क्यों
NSA अजीत डोभाल और वांग यी के पास 'विशेष प्रतिनिधि' का पद है। यह व्यवस्था 2003 में शुरू हुई थी और इसका मकसद दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा के विवाद को सुलझाना था। इसमें प्रगति कभी आसान नहीं रही।
2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनाव के कारण बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से तब शुरू हुई जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में 24वां दौर हुआ।
यह बातचीत का 25वां दौर होगा। यह बातचीत उस सिस्टम के तहत हो रही है जिसे 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर विवाद को सुलझाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने के मकसद से बनाया गया था।
2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनाव के कारण भारत और चीन में बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से तब शुरू हुई जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में 24वां दौर हुआ।
रिपोर्ट
2024 के बाद पहली बार डोभाल की यह यात्रा
डोभाल के लिए यह यात्रा पहली बार हो रही है। 2024 में बातचीत फिर से शुरू होने के बाद से SR-स्तर की बातचीत के लिए बीजिंग की यह उनकी पहली यात्रा है। और यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों सरकारें चुपचाप संकेत दे रही हैं कि रिश्ते बेहतर हो रहे हैं।
एजेंडे में क्या-क्या हो सकती है बातचीत
उम्मीद है कि दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट समझौते (सेनाओं के पीछे हटने के समझौते) की समीक्षा करेंगे। लेकिन क्या पिछले दौर के बाद से 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC)' पर शांति बनी हुई है?
बीजिंग का कहना है कि सीमा पर हालात 'आमतौर पर स्थिर' हैं। दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि 24वें दौर के बाद से वे समझौते पर अमल करने और अगली बैठक की तैयारी में जुटे रहे हैं।
बैठक में सीमा पर सैनिकों की तैनाती का मुद्दा
बैठक में सिर्फ सैनिकों की तैनाती पर ही बात नहीं होगी। तनाव कम करने, सीमा तय करने और सीमावर्ती इलाकों के प्रबंधन के लिए व्यापक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत सीमा-पार आतंकवाद से जुड़ी अपनी चिंताएं भी उठा सकता है। उसने पिछले साल 24वें दौर की बातचीत के दौरान भी यही मुद्दा उठाया था।
डोभाल और वांग यी के बीच सिर्फ सैनिकों की तैनाती पर ही बात नहीं होगी। तनाव कम करने, सीमा तय करने और सीमावर्ती इलाकों के प्रबंधन के लिए व्यापक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत सीमा-पार आतंकवाद से जुड़ी अपनी चिंताएं भी उठा सकता है।
रिपोर्ट
हाल की मुलाकातों से मिली गति
डोभाल और वांग की पिछली मुलाकात जून में नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान हुई थी। दोनों पक्षों ने वहां 'धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल करने' की दिशा में हुई प्रगति पर चर्चा की थी। लेकिन वह कोई औपचारिक SR (विशेष प्रतिनिधि) बैठक नहीं थी, जिसका मतलब है कि मंगलवार का सत्र असल में पिछले अगस्त के बाद से दोनों के बीच सीमा-केंद्रित पहली वास्तविक बातचीत है।
रिश्तों में सुधार दूसरी जगहों पर भी दिख रहा है। सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं। वीज़ा नियमों में ढील दी गई है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है। व्यापार और निवेश में तेजी आई है, और 2025 में द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
रिपोर्ट
मोदी और जिनपिंग के दौरे का रास्ता साफ
राजनयिक पहले से ही मंगलवार के आगे की सोच रहे हैं। सितंबर के आखिर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा की संभावना पर सभी की नजरें हैं।
अगर बीजिंग के साथ बातचीत अच्छी रहती है, तो यह उस यात्रा और भविष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच और अधिक संपर्क का रास्ता साफ कर सकती है।
हालांकि दोनों पक्षों की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि शी के 12-13 सितंबर को होने वाले इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
यह सात साल में शी का भारत का पहला दौरा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी की पिछली मुलाकात अगस्त 2025 में चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।
डोभाल डॉक्ट्रिन क्यों मायने रखती है
अजीत डोभाल के तरीके को अब 'डोभाल डॉक्ट्रिन' के नाम से जाना जाता है। डोभाल डॉक्ट्रिन कूटनीति पर तभी तक सीमित भरोसा करता है, जब तक कि भारत के क्षेत्रीय हितों से कोई समझौता न हो। दिसंबर 2024 में गलवान संघर्ष के बाद लगभग 5 साल के अंतराल के बाद उन्होंने बीजिंग का दौरा किया था। इससे पहले वह ब्रिक्स में हिस्सा लेने 2017 में गए थे।
चिकननेक से भी जुड़ी है बड़ी चिंता
जून 2017 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने डोकलाम में सड़क बनाने का काम शुरू किया। भूटान के अनुरोध और भारत की सुरक्षा हितों को देखते हुए भारतीय सैनिकों ने सीमा पार कर निर्माण कार्य रोक दिया। ऐसे में दोनों देशों की सेनाएं डोकलाम में 73 दिनों तक आमने-सामने डटी रहीं। अगस्त 2017 के अंत में भारत और चीन ने उस विशेष स्थल से अपनी सेनाओं को पीछे हटाने की घोषणा की।
डोकलाम ट्राई-बॉर्डर इलाका भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है, क्योंकि यह संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकननेक के पास है। यह कॉरिडोर को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की जीवन रेखा माना जाता है। यह भारत के सिक्किम, तिब्बत की चुंबी घाटी और भूटान के हा जिले के मिलन बिंदु (ट्राई-जंक्शन) पर स्थित है।
इस क्षेत्र पर चीन और भूटान दोनों अपना दावा करते हैं। किसी दुश्मन देश के इस कॉरिडोर में घुसने और इसे बंद करने की आशंका नई दिल्ली के रणनीतिकारों के लिए हमेशा चिंता का विषय रही है। चीन की इस क्षेत्र में दखलंदाजी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा सामरिक खतरा बन सकती है।
लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।
दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।
दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।
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पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।
दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।... और पढ़ें
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